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....जी हाँ इसे ही हमने बेटी कहा !!!

Posted On: 25 Jun, 2017 में

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इससे क्या फर्क पड़ता है कि कौन राजा बनता है, राजा कोई भी बने या रंक,  किमत तो महिलाओं को ही चुकानी पड़ती है।

यदी रावण राजा बना तो माता सीता का वनवास से अपहरण होगा और यदि श्री राम राजा बने तो सीता को श्रीलंका से लौटकर वापस वनवास का रूख करना पड़ेगा।

यदि कौरव राजा बनते हैं दुष्टों द्वारा, द्रोपदी का अपने ही परिवार के समक्ष भरी सभा मे तन से वस्त्र खींच दिया जायेगा, और अगर पांडव राजा बने तो उसी द्रोपदी को उसी सभा मे किमती सामान की तरह मर्दो के आंनद के लिए होने वाले खेल (जुये) मे दाव पर लगना पड़ जायेगा।

अगर मुस्लिम राजा हुआ तो माँ अहिल्या को खिलजी के मनोरंजन के लिए जबरदस्ती दिल्ली आने का दावत भेज दिया जाएगा, अगर हिन्दू राजा (भारमल जो जोधाबाई के पिता थे) हुआ तो को राजशाही ठाट-बाट बनाये रखने के लिए हिन्दू राजकुमारी को मुस्लिम सम्राट से ब्याह करना पड़ जाएगा।

पता नही किन कर्मों की किमत महिलायें अनादिकाल से चुकाती आ रही हैं सिसक-सिसक कर।

ये वही देवी है जिसने आपको संसार मे लाने के लिए दर्द की पराकाष्ठा को भी मुंह चिढ़ाते हुए उसे हराकर आपको जन्म दिया, इस असीमित दर्द को धता बताने वाली महिला को हमने माँ कहा।

ये वही देवी है जिसने आपको बचाने के लिए आपके गलत होने पर भी इसकी परवाह किए बिना आपके लिए अपने बाप से भी लड़ जाती है जी हाँ इसे ही हमने बहन कहा।

ये वही देवी है जिसने आपको बिना जाने समझे आपके साथ जीवन भर के लिए खड़ी हो गई, आपके दुख के क्षणों मे आपसे ज्यादा दुखी हुई जी हाँ इसे ही हमने पत्नी कहा।

ये वही देवी है जो इस डर से भी कांप गई कि उसके किसी कृत्य से आपको शर्मिंदगी या दिक्कतों का सामना ना करना पड़े, इस कारण उसने एक अनजान का हाथ पकड़कर हमेशा-हमेशा के लिए उसकी हो गई, जी हाँ इसे ही हमने बेटी कहा।

क्यों अबला समझा गया इसे जबकि हर काल मे इसने अपने पराक्रम का लोहा मनवाया इस पुरूष प्रधान देश से।

आकाश की ऊंचाई को नापने का जिम्मा हो,
या समुद्र की गहराई मे उतरने का प्रयास।
सीमाओं पर सीना तानने का हौसला हो,
या तो तकनीक को नये आयाम देने की चुनौती।।

हर क्षेत्र के शिलालेख पर इसका स्वर्णिम इतिहास है, 
सावधान होने की जरुरत है क्योंकि ….

जलजला जब धरती पर इसके क्रोध का आयेगा,
धरती से अम्बर तक सब मिट्टी मे मिल जायेगा।।

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